हिमाचल में फिर शुरू होगी लॉटरी, पंजाब, सिक्किम और केरल राज्य का दौरा करेंगे वित्त विभाग के अधिकारी

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हिमाचल में लॉटरी को दोबारा से शुरू करने के लिए वित्त विभाग के अधिकारी पहले तीन राज्यों का दौरा करेंगे। इसमें पंजाब, सिक्किम और केरल का दौरा होगा। इसके बाद ट्रेजरी एवं लॉटरी विभाग के अधिकारी इसके बाद टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार करेंगे, जिसे आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रोपोजल की शक्ल में बनाया जा रहा है। इससे पहले लॉटरी के नियमों में भी संशोधन किया जा रहा है। ये रूल्स करीब 30 साल पुराने हैं, इसलिए इनमें बदलाव की जरूरत दिख रही है। राज्य मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई, 2025 को यह फैसला लिया था कि हिमाचल में इनकम के साधन बढऩे के लिए लॉटरी को फिर से शुरू किया जाए। इसके बाद से यह मामला वित्त विभाग में ही है, लेकिन अब अगले वित्त वर्ष से पहले लॉटरी को शुरू करने के लिए सारी प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है। यानी सारी टेंडरिंग के लिए 31 मार्च, 2026 तक का ही वक्त है।

इसी कारण अब लॉटरी विंग के निदेशक के साथ कुछ अधिकारियों को तीन राज्यों के दौरे पर भेजा जाएगा। इनमें पड़ोसी राज्य पंजाब भी है, जहां अब भी लॉटरी चल रही है। इसके अलावा सिक्किम और केरल का दौरा भी किया जाएगा। किस राज्य में किस व्यवस्था के तहत यह काम चल रहा है, इसे ये अधिकारी समझेंगे, ताकि हिमाचल में आरएफपी डॉक्यूमेंट बनाते समय इन चीजों का ध्यान रखा जाए।

हर साल 50 से 100 करोड़ कमाने का लक्ष्य

हिमाचल में लॉटरी का अपना इतिहास रहा है। यहां कई वर्ष पहले लॉटरी होती थी, लेकिन वर्ष 2000 में प्रेम कुमार धूमल की भाजपा सरकार के दौरान इसे बंद कर दिया गया था। फिर कांग्रेस की सरकार बनी। तब भी मणिपुर और असम इत्यादि की लॉटरी हिमाचल में बिकती थी। वीरभद्र सिंह सरकार ने 2004 में इसे भी बंद कर दिया, लेकिन अब राज्य सरकार को लग रहा है कि बाकी राज्यों की तर्ज पर लॉटरी से भी कुछ इनकम हो सकती है। सालाना 50 से 100 करोड़ कमाने का लक्ष्य है।

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